Rakshabandhan 2023: जानें कब है रक्षाबंधन, क्या है इसका माहात्म्य, विधि, कथा एवं मुहूर्त

Published by Ved Shri Last Updated: August 24, 2023

श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की रक्षा और लम्बी आयु के लिए उनकी कलाई में रक्षासूत्र (राखी) बाँधती हैं। इस वर्ष रक्षाबंधन की तिथि को लेकर विद्वानों में कुछ मतभेद हैं। आइये जानते हैं रक्षाबंधन का माहात्म्य, उसकी विधि और मंत्र तथा रक्षाबंधन की कथा एवं मुहूर्त।

रक्षाबंधन माहात्म्य
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को विधि-विधान से मंत्रों के साथ रक्षासूत्र बाँधने से व्यक्ति वर्षपर्यन्त पुत्र-पौत्रादि सहित सुखी रहता है:
यः श्रावणे विमलमासि विधानविज्ञो रक्षाविधानमिदमाचरते मनुष्यः।
आस्ते सुखेन परमेण स वर्षमेकं पुत्रप्रपौत्रसहितः ससुहृज्जनः स्यात्।।

रक्षाबंधन विधि
व्रती को चाहिए की इस दिन प्रातः स्नान के उपरांत देवता, पितर और ऋषियों का तर्पण करे। दोपहर के बाद ऊनी, सूती या रेशमी पीला वस्त्र लेकर उसमें सरसो, केसर, चंदन, अक्षत और दूर्वा रखकर बाँध ले। फिर गोबर से लिपे या अन्य शुद्ध स्थान पर कलश स्थापना कर उसपर रक्षासूत्र रखकर उसका विधिपूर्वक पूजन करे। उसके बाद बहन या किसी ब्राह्मण से रक्षासूत्र को दाहिने हाँथ में बँधवाना चाहिए। रक्षासूत्र बाँधते समय नीचे दिए मंत्र को पढ़ना चाहिए:
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

रक्षाबंधन कथा
रक्षाबंधन की कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक बार बारह वर्षों तक देवासुर संग्राम होता रहा, जिसमें देवताओं की परास्त होने लगे। तब दुःखी और हताश इंद्र देवगुरु बृहस्पति के पास गए और कहने लगे कि इस समय न तो मैं यहाँ सुरक्षित हूँ और न ही यहाँ से कहीं निकल ही सकता हूँ ऐसी दशा में मेरा युद्ध करना कहाँ तक उचित है। इस पर बृहस्पति जी ने युद्ध रोक देने की सलाह दी। यह सुनकर वहाँ उपस्थित इंद्राणी ने कहा कि कल श्रावण शुक्ल पूर्णिमा है, मैं विधिपूर्वक रक्षासूत्र तैयार करुँगी और आपकी कलाई पर बाँधूँगी जिसके प्रभाव से आपकी रक्षा होगी और युद्ध में विजयी होंगे। दूसरे दिन इंद्र ने स्वस्तिवाचन सहित विधि-विधान से रक्षाबंधन कराया जिसके प्रभाव से इंद्र सहित सभी देवता विजयी हुए।

रक्षाबंधन मुहूर्त
रक्षाबंधन के लिए पराह्ण व्यापिनी पूर्णिमा तिथि ली जाती है, यदि उस दिन भद्रा हो तो उसका त्याग करना चाहिए क्योंकि भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों वर्जित हैं:
भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा।
श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी।।
इस वर्ष पूर्णिमा तिथि का आरंभ बुधवार 30 अगस्त 2023 को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से होगा जिसका अंत अगले दिन गुरुवार 31 अगस्त 2023 को सुबह 07 बजकर 05 मिनट पर होगा। बुधवार को पूर्णिमा तिथि के आरंभ के साथ ही भद्रा भी शुरू हो जाएगी जिसका अंत बुधवार को ही रात्रि 09 बजकर 02 मिनट पर होगा। अतः उसके बाद ही रक्षाबंधन करना उचित होगा।

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