गणेशजी हिन्दुओं पूज्य देवता हैं। सनातन धर्मावलम्बियों के घर में चाहे जैसी पूजा या क्रियाकर्म हो सर्वप्रथम श्रीगणेश का ही आवाहन और पूजन किया जाता है। गणेशजी विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं। आइये आज जानते हैं सिद्धिविनायक व्रत (Ganesh Chaturthi 2023) का माहात्म्य, पूजा विधि एवं मुहूर्त।
सिद्धिविनायक व्रत माहात्म्य
सिद्धिविनायक व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को किया जाता है। इसे गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि को विघ्नहर्ता गणेशजी का मध्याह्न में जन्म हुआ था। अतः इसमें मध्याह्न व्यापिनी तिथि ली जाती है। गणेश चतुर्थी के दिन नक्तव्रत का विधान है अतः मध्याह्न में यथासम्भव पूजा करके सायंकाल में भोजन करना चाहिए। इस व्रत से मनोवाञ्छित कार्य सिद्ध होते हैं और बुद्धि, विद्या तथा रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति एवं विघ्नों का नाश होता है।
सिद्धिविनायक व्रत विधि
गणेश चतुर्थी के दिन प्रातः स्नानादि नित्यकर्म से निवृत्त हो “मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायकपूजनमहं करिष्ये” मन्त्र से व्रत का संकल्प लें। फिर स्वस्तिक मण्डल पर गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर “ॐ गं गणपतये नमः” से षोडशोपचार पूजन करें और फिर 13 ‘नामपूजा’ एवं 21 ‘पत्रपूजा’ करके अंत में 21 मोदक अर्पण कर “विघ्नानि नाशमायान्तु सर्वाणि सुरनायक। कार्यं मे सिद्धिमायातु पूजिते त्वयि धातरि।।” मन्त्र से प्रार्थना करें और मोदकादि वितरण करके एक बार भोजन करें।
सिद्धिविनायक व्रत मुहूर्त
इस वर्ष सिद्धिविनायक व्रत मंगलवार, 19 सितम्बर 2023 को है। उस दिन चतुर्थी दोपहर 01 बजकर 43 मिनट तक रहेगी।


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