Kedarnath
बद्रीनाथ धाम को लेकर एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है “जो जाए बदरी, वो न आए ओदरी” जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है उसे मां के उदर अर्थात गर्भ में दोबारा नहीं आना पड़ता और वह इंसान जन्म-मृत्यु के चक्कर से छूट जाता है। यह पवित्र धाम ऋषिकेश से लगभग 294 कि.मी.की दूरी पर उत्तर दिशा में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है।
बद्रीनाथ धाम के बारे में एक रोचक कथा प्रचलित है। माना जाता है कि पहले यह शिव की भूमि थी और बाद में श्री हरि विष्णु का निवास स्थान बना। कथा के अनुसार भगवान विष्णु की यह भूमि पहले भोलेनाथ की निवास स्थली थी लेकिन एक दिन भगवान विष्णु जब ध्यान करने के लिए स्थान की खोज में थे तो इस जगह को देख कर मोहित हो गए। उन्हें पता था कि यह पावन भूमि उनके आराध्य भगवान् शंकर का निवास है ऐसे में वो यहाँ कैसे रह सकते हैं। तभी उनके मन में एक लीला करने का विचार आया और उन्होंने बालक का रूप लिया और जोर-जोर से रोना शुरू कर दिया। शिशु के क्रंदन को सुनकर माता पार्वती ने उसे चुप कराने का प्रयास किया पर वो चुप ही नहीं हो रहा था तो उसे गोद में लेकर घर के अंदर जानें लगीं इस पर भगवान शंकर जो विष्णु जी की लीला को जान रहे थे ने उन्हें मना किया पर माँ की ममता उसे कैसे छोड़ दे, माता पार्वती ने उस बालक को अंदर ले जाकर सुला दिया। बालक के सोने के उपरांत माँ पार्वती जब बाहर आयीं तो विष्णु जी ने अंदर से दरवाजे बंद कर लिए और माँ पार्वती और भगवान् शंकर से कहा की मुझे यह स्थान बहुत प्रिय लगा और मैं यहीं रहकर अपने भक्तों को दर्शन देना चाहता हूँ, कृपा करके आप लोग केदारनाथ जाएँ। और इस तरह शिवधाम विष्णुधाम बन गया।


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